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लैलूंगा का जवाफूल बन रहा किसानों की समृद्धि का जरिया

बढ़ती मांग के बीच बीज और चावल लेने पहुंच रहे दूसरे क्षेत्रों के किसान

रायगढ़, 12 जून 2026/ कभी केवल स्थानीय स्तर पर पहचाना जाने वाला लैलूंगा का पारंपरिक जवाफूल धान अब किसानों की आय बढ़ाने वाला एक मजबूत ब्रांड बनकर उभर रहा है। इसकी बढ़ती मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दूसरे क्षेत्रों के किसान स्वयं लैलूंगा पहुंचकर इसका बीज और चावल खरीद रहे हैं। हाल ही में खरसिया क्षेत्र से पहुंचे किसानों और ग्रामीणों ने जवाफूल चावल की सुगंध और गुणवत्ता की सराहना करते हुए कहा कि इसकी विशेष खुशबू ने उन्हें दोबारा लैलूंगा आने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही उन्होंने यहां से चावल के साथ-साथ बीज भी खरीदा, ताकि अपने क्षेत्र में इसकी खेती कर सकें।
लैलूंगा के किसान चंद्रशेखर पटेल ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष चार एकड़ में जवाफूल धान की खेती की थी, जिससे लगभग 40 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। वर्तमान में इस धान की मांग इतनी अधिक है कि उपलब्ध उत्पादन से सभी मांगों की पूर्ति कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा उत्पादित जवाफूल धान और चावल रायगढ़, रायपुर, अंबिकापुर, रामानुजगंज, ओडिशा और मध्यप्रदेश सहित कई क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। कई उपभोक्ता अग्रिम भुगतान कर चावल की बुकिंग कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जवाफूल की विशेष सुगंध, स्वाद और स्थानीय जलवायु इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि यह धीरे-धीरे बाजार में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लैलूंगा विकासखंड का चयन जैविक सुगंधित धान फसल ‘जवाँ फूल’ की खेती के लिए किया गया है। प्रशासन द्वारा बढ़ती मांग को देखते हुए किसानों को इसके रकबे में विस्तार के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पिछले वर्ष जहां 315 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की गई थी और 521 किसानों को लाभ मिला था, वहीं इस वर्ष इसका रकबा बढ़ाकर 750 हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

Sanjay Sahni

Editor in chief - Raegarhnews.in Mo.-9329266509

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