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पारंपरिक खेती से उद्यानिकी की ओर बदला रूख,गेंदा फूल की खेती से किसान को मिला डेढ़ लाख का शुद्ध लाभ

*गेंदा फूल की खेती से बदली किसान की किस्मत, शासन की योजना बनी आर्थिक संबल*

*पारंपरिक खेती से उद्यानिकी की ओर प्रेरक कदम,अन्य किसानों के लिए बना सफलता और आयवृद्धि का मॉडल*

रायगढ़,24 दिसंबर 2025। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम गमेकेला के प्रगतिशील किसान श्री शंभूचरण पैंकरा ने अपनी कड़ी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि सही अपनी परम्परा गत खेती से हट, सही मार्गदर्शन, नवाचार और शासन की योजनाओं का लाभ लेकर खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों में रुचि रखने वाले श्री पैंकरा ने कम पानी में अधिक आमदनी देने वाली फसलों की जानकारी मिलने पर उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और खेती की दिशा ही बदल दी।
पिछले कई वर्षों में वे टिकरा धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें अपेक्षाकृत कम आय प्राप्त होती थी। सीमित आमदनी और बढ़ती लागत को देखते हुए उन्होंने वैकल्पिक खेती की ओर रुख किया। वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लिया। इस योजना के तहत उन्हें गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, खाद एवं उर्वरक के साथ-साथ तकनीकी सलाह भी प्रदान की गई।
एक एकड़ क्षेत्र में गेंदा की खेती कर श्री शंभूचरण पैंकरा ने लगभग 25 क्विंटल फूल का उत्पादन प्राप्त किया। बाजार में गेंदा फूल की निरंतर मांग होने के कारण उन्हें उचित मूल्य मिला और गेंदा की खेती से लगभग 1 लाख 50 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया। इस अतिरिक्त आय से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ, बल्कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने में भी उन्हें मजबूती मिली।
श्री पैंकरा की इस सफलता का प्रभाव अब गांव के अन्य किसानों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गेंदा की खेती से होने वाली आमदनी को देखकर ग्राम गमेकेला सहित आसपास के गांवों के किसान भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और गेंदा फूल की खेती अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कृषक श्री शंभूचरण पैंकरा ने छत्तीसगढ़ शासन एवं उद्यानिकी विभाग के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और यदि सही जानकारी व मार्गदर्शन मिले तो किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

Sanjay Sahni

Editor in chief - Raegarhnews.in Mo.-9329266509

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