खेती को उद्योग का दर्जा दिया जावे

रायगढ़ / पूर्वाचल कृषक सम्मेलन का छत्तीसगढ़ी समाज जिला शाखा रायगढ़ द्वारा बटमूल आश्रम साल्हेओना-बनोरा में आयोजन किया गया जिसमें सभा को पटना बिहार से सम्बोधन करने आए प्रऊत विचारधारा के वक्ता ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश के नीति-निर्धारकों ने योजनान्तर्गत किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया है. कृषि एवं कृषकों की सतत् उपेक्षा के चलते खेती आज पूर्णतः घाटे का कारोबार बन चुका है, किसान खेती से विमुख होते जा रहे हैं. एक सर्वेक्षण में तथ्य सामने आया कि सर्वाधिक खाद्यान्न उपजाने वाले प्रान्त पंजाब के 40 प्रतिशत किसान खेती करना छोड़ना चाहते हैं, हरियाणा से किसानो का खेती से पलायन शुरू हो चुका है, वहाँ के राज्य अर्थ व्यवस्था में खेती की हिस्सेदारी जो पहले 42.5 प्रतिशत था, मात्र 28.2 प्रतिशत हो चुका है. आज देश की राजनीतिक एवं आर्थिक परिस्थितियाँ किसानों के प्रतिकूल है. देश के व्यवसायी एवं उद्यमी वर्ग को जहाँ मुनाफा खोरी की खुली छूट प्राप्त है, वहीं किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य अपनी कृषि उपज बेचना पड़ता है जो इतना कम होता है कि किसान अपना कृषि लागत भी नहीं निकाल पाते. सरकार द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र के तहत् जो रियायतें एवं छूट उद्यमियों एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को प्रदान की जा रही है उससे भी यही सिद्ध होता है कि किसानों के मत से चुने गए ये राजनेता जन-प्रतिनिधि के रूप में काम न करके पूँजीपतियों के दलाल बनकर कमीशनखोर के रूप में अधिक काम कर रहे हैं. इसलिए देश के किसानों को अब संगठित होकर वर्तमान किसान विरोधी नितियों के विरूद्ध एक राष्ट्रव्यापी सशक्त आन्दोलन करना होगा तथा प्रऊत की कृषि नीति को अपनाकर आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करनी होगी. प्रऊत व्यवस्था में सत्ता का विकेन्द्रीयकरण होगा जिसमें सत्ता और पूँजी अलग-अलग हाथों में होगी, बड़े उद्योग शासन द्वारा न लाभ न हानि सिद्धान्त पर स्थापित होगा तथा मध्यम श्रेणी के उद्योग सहकारिता के आधार पर संचालित होंगे जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी होगी और बेरोजगारी समाप्त होगी. विकास की योजनायें विकासखण्ड स्तर पर बनाये जायेंगे. जिससे देश का प्रत्येक किसान आर्थिक आजादी का जीवन जी सके. इसलिए सरकार से पुरजोर आग्रह है कि किसान जो देश की अर्थतंत्र का नींव है उसे उसकी खेती को उद्योग का दर्जा दिया जाये. सभा में ग्राम महापल्ली, बनोरा, कोसमपाली, कोतरलिया, जुर्जा, विश्वनाथपाली, सकरबोगा साल्हेओना, कोड़ातराई, औरदा तथा आसपास के ग्रामीण सम्मिलित हुए।
