RAIGARH

अडानी और एसईसीएल के लिए रायगढ़ के ‘जीवनरेखा’ की बलि चढ़ाने पर उतारू प्रशासन! नगेंद्र नेगी

कांग्रेस ने कहा जन भावना और नियमों के विरुद्ध जनसुनवाई निरस्त करें प्रशासन

रायगढ़ । आदिवासी बाहुल्य रायगढ़ जिले को लालफीताशाही और उद्योगपतियों ने उजड़ने के षड्यंत्र कर के मनमानियों का ठिकाना बना लिया है।रायगढ़ जिले मे सालों से पुनर्वास नीति फाइलों में दफन करके और जनता के हक पर ‘डकैती’ डाल कर जनभावनाओं के खिलाफ कार्य करके प्रशासन ने नई जनसुनवाई को तारीख भी दे दी पर जनता के हितों को लात मारकर सरकार जनसुनवाई करवाई तो होगा कांग्रेस पार्टी तमनार सहित जिले में उग्र आंदोलन का आह्वान करेगी,आगामी 19 मई को एसईसीएल जिला एमडीए अडानी कंपनी के हितों को सुरक्षित करता है कि जनसुनवाई आहुत है लेकिन एसईसीएल की पुनर्वास नीति सालों से रायगढ़ जिले फाइलों की धूल फांक रही है पर जिला भूअर्जन अधिकारी हाथ पर हाथ धर के बैठे हैं यह वक्तव्य जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष नगेंद्र नेगी ने दिया है।
उन्होंने कहा गारे-पेल्मा कोल परियोजना के नाम पर आदिवासियों और किसानों की ‘जल,जंगल और जमीन को कॉर्पोरेट घरानों की भेंट चढ़ाने की तैयारी बीजेपी सरकार में खुले आम हो रही है।
जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष नगेन्द्र नेगी ने इस विनाशकारी परियोजना और प्रशासन के अड़ियल रुख के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अडानी और एसईसीएल के मुनाफे के लिए रायगढ़ की जनता का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगेन्द्र नेगी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिले के कलेक्टर और भू-अर्जन अधिकारी के पास नियमत:अधिकार सुरक्षित हैं, लेकिन उनके नाक के नीचे एसईसीएल पुनर्वास नीति की धज्जियां उड़ा रहा है।पुनर्वास की ठोस फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं और बिना किसी पुनर्व्यवस्था के ग्रामीणों को उजाड़ने की साजिश रची जा रही है। नेगी ने तीखे प्रहार करते हुए कहा कि अडानी के फायदे के लिए केलो नदी के मार्ग (डाइवर्जन) को बदलने की योजना आत्मघाती है।केलो रायगढ़ की जीवनरेखा है। नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ करना आने वाली पीढ़ियों को भीषण जल संकट और तबाही की ओर धकेलना है। कांग्रेस ने सीधा सवाल दागा है— “क्या चंद कंपनियों की तिजोरियां भरने के लिए पूरे जिले के खेतों की फसल के पानी और जनता की प्यास को दांव पर लगाना ही विकास है?” समाचार माध्यमों से यह स्पष्ट है कि समान कोयला उपलब्धता के बावजूद अलग-अलग गांवों के लिए मुआवजे की दरें अलग-अलग तय की जा रही हैं। कांग्रेस मांग करती है कि यदि किसान सहमत हो तो किसानों को उनकी जमीन का उचित और एक समान बाजार मूल्य दिया जाए। भूमिहीन मजदूरों और आदिवासी समुदायों के पुनर्वास के लिए ठोस नीति बनाई जाए, क्योंकि गांव उजड़ने से उनकी आजीविका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। और जनसुनवाई से पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था तथा स्थान सुनिश्चित किया जाए। यह स्पष्ट है कि समान कोयला उपलब्धता के बावजूद अलग-अलग गांवों के लिए मुआवजे की दरें अलग-अलग तय की जा रही हैं।भूमिहीन मजदूरों और आदिवासी समुदायों के पुनर्वास के लिए ठोस नीति बनाई जाए, क्योंकि गांव उजड़ने से उनकी आजीविका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके बाद अगली स्थानीय ग्रामीण सहमत होते हैं तो इस एसईसीएल और अडानी के संयुक्त परियोजना के लिए जनसुनवाई आहूत किया जाए वर्तमान में यह जनसुनवाई पूरी तरह नियमों और जन भावनाओं के विपरीत प्रशासन द्वारा जबरन कराई जा रही है इसे तत्काल निरस्त किया जाए।

19 मई की जनसुनवाई: प्रशासन को ‘अंतिम’ चेतावनी

कांग्रेस ने प्रशासन द्वारा नियमों के विरुद्ध कराई जा रही 19 मई की जनसुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। नेगी ने चेतावनी देते हुए कहा, “जब तक ग्रामीणों को उचित मुआवजा, स्पष्ट विस्थापन नीति और पर्यावरण सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती,तब तक जनसुनवाई होने नहीं दी जाएगी।”
“मुनाफा कंपनियों का और जहर का धुआं जनता के हिस्से—यह अन्यायपूर्ण समीकरण अब रायगढ़ में नहीं चलेगा। अगर प्रशासन ने ग्रामीणों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो कांग्रेस कंधे से कंधा मिलाकर उग्र आंदोलन करेगी और ईंट से ईंट बजा देगी।”

Sanjay Sahni

Editor in chief - Raegarhnews.in Mo.-9329266509

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