रियासत कालीन पुरानी बस्ती जोगीडीपा को उजाड़ने नगर निगम ने भेजा बेदखली का नोटिस

प्रभावितों में मचा हड़कंप अपनी आशियाना बचाने किसके पास गुहार लगाएं।
रायगढ़ / जोगीडीपा दलित समुदाय बस्ती है जहां मजदूर तबके के लोग जीवन यापन करते हैं। यह बस्ती रियासत कालीन पुरानी बस्ती के नाम से जानी जाती है। यहां के लोग रोज मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, चुंकि यह बस्ती शहर के मध्य स्थल में होने के कारण यहां के कॉलोनाइजरों की गिद्ध नजर इस पर जमी हुई थी।आज उसी की खामीयाजा मोहल्ले वासियों को या फिर एक समुदाय को भुगतना पड़ रहा है।
मोहल्ले के बुजुर्गों द्वारा बताया जा रहा है कि कई पीढ़ी से लोग यहां रह रहे हैं लेकिन प्रशासन की दमनकारी नीति के कारण बेबस मजबूर गरीबों को अपनी आशियाना छोड़ने मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि प्रस्तावित कैनाल लिंक रोड की सर्वे ड्राइंग डिजाइन पहले से तय की जा चुकी थी अचानक से किसी धनाडय मित्र या शखा इस जगह जमीन खरीदी जाती है और उसी समय प्रशासन अपनी प्रस्तावित योजना को डायवर्ट कर देती है। प्रशासन कब तक किसी को निजी लाभ दिलाने के लिए गरीबों के घरोंदे उजाड़ेगी
प्रभावितों का कहना है कि हमारी बस्ती रायगढ़ शहर की रियासत कालीन पुरानी बस्ती में शामिल है और हम देख रहे हैं कि हमारे अगल-बगल आसपास जितने भी बस्ती बसी है, सभी जगह सरकार की योजना प्रधानमंत्री आवास बनाई जा रही है,परंतु सरकार की कौन सी ऐसी योजना की कालीख के हमारे मोहल्ले में पोती गई है जो अब तक नहीं मिट पा रही है। 1994 से पूर्व नगर पालिका भंग थी, 1994 में नगर पालिका अपने अस्तित्व में आने के बाद जोगीडिपा में जितने भी जनप्रतिनिधि बने किसी ने भी जोगीडिपा में लगे सरकार की स्लम एरिया, गंदी बस्ती योजना,झुग्गी झोपड़ी इन सभी को हटाने के लिए कभी भी प्रयास नहीं किया। आज शायद उसी का खामियाजा मोहल्लेवासी भुगत रहे हैं। और आगे भी मोहल्लेवासी को भय सता रही है की कहीं हम सभी मोहल्लेवासी को यहां से हटाकर फिर कहीं भेज ना दे। किसी बड़े आदमी ने यहां जमीन खरीदी है और अपने जमीन केp पास उसने सड़क पहुंचा दी है तो निश्चित ही वहां एक कॉलोनी का निर्माण करेगा।बात की जाए जोगीडीपा मोहल्ले की तो यहां एक ही वर्ग के लोग निवास करते है। पूरे प्रदेश में एक ही मोहल्ले हैं जहां सिर्फ और सिर्फ एक ही वर्ग के लोग रहते हैं अब उसे ही प्रशासन अलग-थलग करने जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्लम एरिया या गंदी बस्ती होने के कारण जब प्रधानमंत्री आवास योजना की मकान नहीं बन सकती तो यहां सड़क चौड़ीकरण कर प्रशासन रोड़ कैसे बना सकती है। यह भी एक जांच का विषय है। देखना यह है की हटने से पूर्व मोहल्ले वासियों का विरोध कहां तक जाती है या फिर कब तक लड़ पाती है। नगर निगम को भी ध्यान देना चाहिए कि रियासत कालीन पुरानी बस्ती जो की एक धरोहर के रूप में जाननी चाहिए या फिर किसी को सीधा लाभ पहुंचाने के लिए गरीबों के मकानों में बुलडोजर चला देना क्या न्याय उचित है।
